यादों के सहारे वक़त गुज़र सकता है।
ज़िन्दगी गुज़ारने के लिये मुझे जरूरत है तुम्हारी।
कुछ दूर तोह मैं तनहा भी चल सकता हूँ।
ज़िन्दगी भर चलने के लिए मुझे जरूरत है तुम्हारी।
अजनबियों के साथ बात तोह करता हूँ मैं।
पर हाल-ऐ-दिल सुनाने के लिए मुझे जरूरत है तुम्हारी।
ख़ुशी में तोह सारी दुनिया साथ होती है।
लेकिन गम बांटने के लिए मुझे जरूरत है तुम्हारी।
तनहाइयों में अक्सर मैं गुनगुना लेता हूँ।
मगर प्यार के गीत गाने के लिए मुझे जरूरत है तुम्हारी।
© चन्द्र शेखर मनकोटिया
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