अपने दर्द को छिपाना सीख लिया है मैंने।।
बेवजह मुस्कुराना भी सीख लिया है मैंने।।
वक़्त के सांचे में पिघलना सीख गया हूँ।।
मुश्किल इन राहों पर चलना सीख गया हूँ।।
सुख नहीँ रहे तोह गम भी गुज़र जाएंगे।।
ये पल रोकर काट लेता हूँ फिर तोह तमाम उम्र मुस्कुरायेंगे।।
ज़िन्दगी की उलझनों में खुद को सुलझाना सीख लिया है मैंने।।
कोई समझे ना समझे खुद को समझाना सीख लिया है मैंने।।
अपनों से धोखे खाकर सम्भलना सीख गया हूँ।।
फिसलने का कोई खौफ नहीँ है चलना सीख गया हूँ।।
दुनियादारी के बोझ को उठाना सीख गया हूँ।।
रूठ जाए जो कोई मुझसे तोह मनाना सीख गया हूँ।।
दूसरों को तोड़कर खुदको जोड़ना नहीँ सीखा।।
बुरे हालातों में भी मुंह मोड़ना नहीँ सीखा।।
दोस्ती में कभी फरेब करना नहीँ सीखा।।
एक बार जो डट गया तोह डरना नहीँ सीखा।।
किसी की कमजोरी पर हंसना नहीँ सीखा।।
लाचारों और मजबूरों को डसना नहीँ सीखा।।
इनसानियत से पहले धर्म कभी आते ही नहीँ।।
सोच पर मर जाता हूँ जनाब चेहरे कभी लुभाते ही नहीँ।।
गिरगिट की तरह रंग बदलना नहीँ आया।।
पैसों के लिए रिश्तों को कुचलना नहीँ आया
कितना भी मझबूर हो जाऊं रिश्वतखोरी नहीँ करता।।
भूखा भी सो लेता हूँ पर कभी चोरी नहीँ करता।।
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