कल जब कीमत इंसानियत की पता चलेगी तोह रोयेंगे।।।
मज़बूर इतना था की बारिशों की दुआ करता था।।
ताकि कुछ पल चैन से जी सके अपनी झोंपड़ी में।।
यहाँ तोह दिनों के हिसाब से भगवान बंटे हैं।
जब उनको उनके अंदाज़ में जवाब दिया मैंने।।
कुछ पल के लिए बचपन ही वापिस कर दे मैं माँ की गोद में सो लूँ।।
जो चन्द पैसों के लिए अपना ज़मीर बेच लेते हैं।।
बर्बाद होने के लिए तोह ये इश्क़ ही बहुत है।।
पर ऐसा कोई शख्स ही नहीँ था जो हमको बर्बाद कर जाता।।
ना जाने क्यों हर शख्स इश्क़ चुनता है।।
ज़िन्दगी के शोर में अब जिया नहीं जाता।
टुटा उस वक़्त जब कुछ अपने ही पहचानने से इनकार कर गए।।
हमने कहा कम्बखत जो मज़ा मादहोशियों में है वोह होश में कहाँ।।
कम्बखत उनके दिए दर्द सुनाकर ही रुलाउंगा उनको।।
हमसे तोह तेरा बनाया एक शख्स नहीँ भुलाया जाता।।
कम्बखत कोई तोह समझे मुझे दुआओं की नहीँ सहारे की जरूरत है।।
कम्बखत जमाना हो गया है मुझे चैन की नींद सोये हुए।।
जब जब तेरे दिए दर्द सुनाता हूँ मैं।।।
ये पैसे की भूख है कि मिटती ही नहीँ।।
सोचता हूँ फिर से कोई गुनाह करूँ।।
ताकि अपनों को जोड़ सके।।
ताकि वाकी सबके लिए पूरा हो सके।।
जिसको कभी माँ के हाथ के सिवा कहीं स्वाद नहीँ आता था।।