Sunday, April 9, 2017

किसान

वोह बारिशों की दुआएं।।
वोह धूप में कड़ी मेहनत।।
वोह जाग के काटी रातें।।
वोह छत से टपकती बरसातें।।
फिर भी खुदा के रंगों में रंग जाना आसान तोह नहीँ।।
आखिर किसान हो जाना आसान तोह नहीँ।।

वोह सूखे का खौफ।।
वोह कोहरे की मार।।
वोह बाढ़ के आने का डर।।
सब सहकर भी पसीना बहाना आसान तोह नहीँ।।
आखिर किसान हो जाना आसान तोह नहीँ।।

वोह पैसे के लाले।।
वोह मंडी की लंबी लाइने।।
वोह मोल ना मिलने का दर्द।।
फिर भी घर की जरूरतों के लिए खुद को भूल जाना आसान तोह नहीँ।।
आखिर किसान हो जाना आसान तोह नहीँ।।

वोह उजड़े हुए खेत।।
वोह सूखी उड़ती रेत।।
दिनों में ही हरे भरे से वीरान हो जाना।।
जो किस्मतों में था मिल गया ये खुद को समझाना आसान तोह नहीँ।।
आखिर किसान हो जाना आसान तोह नहीँ।।

वोह बैंकों की किश्तें।।
मुश्किलों में टूटते रिश्ते।।
मझबूरियों में सबकुछ यूँ ही छोड़ के मर जाना आसान तोह नहीँ।।
आखिर किसान हो जाना आसान तोह नहीँ।।

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