प्यासा ना कोई रहे तोह कुछ बूंद पानी मांग बैठा।।
मर के भी ना मिटे वोह जिंदगानी मांग बैठा।।
देश की खातिर बहे वोह रक्त मांग बैठा।।
अपनों में जो गुज़रे वोह वक़्त मांग बैठा।।
जो देश से गरीबी मिटाए वोह खजाना मांग बैठा।।
भूखा ना कोई सोये तोह सबके लिये खाना मांग बैठा।।
गया था खुदा के घर मांगने को मैं।।
बेघर के लिए घर माँग बैठा, खुशियों भरी डगर मांग बैठा।।
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